सोयाबीन की अच्छी फसल की शुरुआत अच्छे बीज से होती है। बीज बाहर से ठीक दिखे, यह पर्याप्त नहीं है। असली बात यह है कि उसमें अंकुरण क्षमता कितनी है, उसके अंकुर कितने स्वस्थ हैं, और खेत में जाने के बाद वह मजबूत पौधे में बदल पाएगा या नहीं। इसी कारण अंकुरण परीक्षण बहुत महत्वपूर्ण है।
प्रयोगशाला में सोयाबीन बीज का अंकुरण परीक्षण एक मानक पद्धति से किया जाता है। यह काम अंतरराष्ट्रीय बीज परीक्षण मानकों के अनुसार किया जाता है, ताकि परिणाम विश्वसनीय और तुलनीय हों। सही पद्धति अपनाने से यह पता चलता है कि बीज लॉट कितना अच्छा है, उसमें सामान्य अंकुर कितने बन रहे हैं, असामान्य अंकुर कितने हैं, और कहीं बीज मृत तो नहीं है।
अंकुरण परीक्षण का उद्देश्य क्या है
अंकुरण परीक्षण केवल यह देखने के लिए नहीं होता कि बीज फूट रहा है या नहीं। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि बीज से सामान्य, स्वस्थ और जीवित पौधा बनने की क्षमता कितनी है।
इसीलिए परीक्षण में केवल अंकुर निकल आना पर्याप्त नहीं माना जाता। यह भी देखा जाता है कि:
- जड़ अच्छी तरह विकसित हुई है या नहीं
- तना सीधा और स्वस्थ है या नहीं
- अंकुर सामान्य है या असामान्य
- कुछ बीज मृत या रोगग्रस्त तो नहीं हैं
प्रयोगशाला में आवश्यक सामग्री
सोयाबीन के एक नमूने के अंकुरण परीक्षण के लिए सामान्यतः 400 बीज लिए जाते हैं। इन्हें 100-100 बीज के चार पुनरावृत्तियों में रखा जाता है। यह व्यवस्था परिणाम को अधिक भरोसेमंद बनाती है।
इस परीक्षण में मुख्य रूप से पेपर टॉवल पद्धति का उपयोग किया जाता है, जो प्रयोगशाला की मानक विधि है। इसके लिए निम्न सामग्री की आवश्यकता होती है:
- सोयाबीन का बीज नमूना
- पेपर टॉवल
- पानी
- बटर पेपर
- 100 बीज रखने वाला छिद्रित बोर्ड या ट्रे
- जर्मिनेटर
पेपर टॉवल को कैसे तैयार करें
पेपर टॉवल को पानी में भिगोया जाता है, लेकिन एक बात बहुत ध्यान रखने की है। टॉवल इतना ही भीगा होना चाहिए कि वह पानी अच्छी तरह सोख ले, पर उससे पानी टपकना नहीं चाहिए।
यदि पेपर बहुत गीला होगा, तो बीजों के आसपास जरूरत से ज्यादा नमी बन सकती है। इससे फफूंद या खराब अंकुरण की समस्या बढ़ सकती है। दूसरी तरफ, पेपर कम भीगा होगा तो पर्याप्त नमी नहीं मिलेगी। इसलिए संतुलित नमी बहुत जरूरी है।
100 बीज की एक पुनरावृत्ति कैसे लगाई जाती है
सबसे पहले भीगा हुआ पेपर टॉवल समतल रखा जाता है। उसके ऊपर 100 छिद्र वाला बोर्ड या ट्रे रखा जाता है, ताकि बीज समान दूरी पर जमाए जा सकें।
इसके बाद 100 बीज एक-एक करके उन स्थानों पर रखे जाते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि सभी बीज बराबर दूरी पर रहें और एक-दूसरे पर दबाव न डालें।
जब 100 बीज सही तरह से रख दिए जाते हैं, तब उनके ऊपर दूसरा भीगा हुआ पेपर टॉवल सावधानी से ढक दिया जाता है।
रोल बनाते समय क्या सावधानी रखें
ऊपर और नीचे दोनों ओर भीगा हुआ पेपर टॉवल आने के बाद उसे बहुत हल्के हाथ से रोल किया जाता है। यहां सबसे बड़ी सावधानी यह है कि रोल बनाते समय अधिक दबाव न दिया जाए।
यदि दबाव ज्यादा होगा तो अंकुरों के लिए जगह कम हो सकती है और बीजों की स्थिति बिगड़ सकती है। इसलिए रोल को केवल इतना कसाव दें कि वह व्यवस्थित रहे, लेकिन बीज दबें नहीं।
इसी प्रकार दो रोल तैयार किए जा सकते हैं, जिनमें 200 बीज हों। फिर ऐसे दो सेट मिलाकर एक नमूने के कुल 400 बीज पूरे किए जाते हैं।
बटर पेपर का उपयोग क्यों किया जाता है
तैयार रोलों को बटर पेपर में लपेटा जाता है। यह एक महत्वपूर्ण चरण है क्योंकि इससे नमी का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है और रोल व्यवस्थित अवस्था में रहते हैं।
एक नमूने के लिए कुल चार पुनरावृत्तियों यानी 400 बीज तैयार होने के बाद इन्हें जर्मिनेटर में रखा जाता है।
जर्मिनेटर की मानक स्थितियां
अंकुरण परीक्षण का परिणाम तभी सही माना जाएगा जब नियंत्रित परिस्थितियां ठीक से बनाए रखी जाएं। सोयाबीन के लिए जर्मिनेटर में सामान्यतः ये स्थितियां रखी जाती हैं:
- तापमान: 25 डिग्री सेल्सियस, प्लस माइनस 2 डिग्री
- सापेक्ष आर्द्रता: 75 प्रतिशत से अधिक
- अवधि: 7 दिन तक इनक्यूबेशन
- प्रकाश व्यवस्था: नियंत्रित प्रकाश और अंधकार की व्यवस्था
इन स्थितियों में बीजों को सात दिन तक रखा जाता है। इसके बाद अंकुरण का मूल्यांकन किया जाता है।
सात दिन बाद परिणाम कैसे पढ़ें
सात दिन पूरे होने पर प्रत्येक पुनरावृत्ति का सावधानी से निरीक्षण किया जाता है। यहां सबसे पहले अंकुरों को श्रेणियों में बांटा जाता है:
- सामान्य अंकुर
- असामान्य अंकुर
- मृत बीज
सामान्य अंकुर क्या होते हैं
सामान्य अंकुर वे होते हैं जिनमें जड़ और तना दोनों अच्छी तरह विकसित हों। ऐसे अंकुर सीधे, संतुलित और स्वस्थ दिखते हैं। इन्हें देखकर यह भरोसा होता है कि खेत में ये आगे चलकर सामान्य पौधे बन सकते हैं।
यदि किसी नमूने में 100 बीजों में 80 ऐसे अंकुर मिले, तो यह बहुत अच्छा संकेत माना जाता है, खासकर जब अंकुरों में जोश और वृद्धि क्षमता स्पष्ट दिखाई दे।
असामान्य अंकुर क्या होते हैं
असामान्य अंकुर वे होते हैं जो मुड़े हुए हों, जड़ या तना ठीक से विकसित न हुआ हो, या जिनकी संरचना ऐसी हो कि उनसे खेत में स्वस्थ पौधा बनने की संभावना कम हो।
ऐसे अंकुर तकनीकी रूप से अंकुरित तो दिख सकते हैं, लेकिन इन्हें अच्छे अंकुरण में नहीं गिना जाता, क्योंकि बाद में ये पौधे अक्सर कमजोर पड़ जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं।
मृत बीज की पहचान
कुछ बीज ऐसे भी हो सकते हैं जो बिल्कुल अंकुरित न हों। कई बार ऐसे बीज फफूंद से प्रभावित मिलते हैं और जीवित नहीं रहते। इन्हें मृत बीज की श्रेणी में रखा जाता है।
अंकुरण प्रतिशत की गणना कैसे करें
अंकुरण प्रतिशत निकालते समय मुख्य रूप से सामान्य अंकुरों की संख्या को आधार माना जाता है।
उदाहरण के लिए:
- यदि 100 बीजों में 90 सामान्य अंकुर मिले, तो अंकुरण 90 प्रतिशत माना जाएगा
- यदि 400 बीजों में 280 सामान्य अंकुर मिले, तो अंकुरण 70 प्रतिशत होगा
- यदि 400 बीजों में 360 सामान्य अंकुर मिले, तो अंकुरण 90 प्रतिशत होगा
इसलिए केवल अंकुर निकलना काफी नहीं है। गणना करते समय यह जरूरी है कि अच्छे, सामान्य और खेत योग्य अंकुर ही गिने जाएं।
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रिकॉर्ड करते समय क्या लिखें
अंकुरण परीक्षण के बाद नोटिंग बहुत व्यवस्थित होनी चाहिए। कम से कम तीन बातें अवश्य दर्ज करें:
- सामान्य अंकुरों की संख्या
- असामान्य अंकुरों की संख्या
- मृत बीजों की संख्या
यदि किसी नमूने में 90 सामान्य अंकुर और 10 असामान्य अंकुर हों, और मृत बीज न हों, तो उसका अंकुरण 90 प्रतिशत माना जाएगा। ऐसा बीज लॉट अच्छी गुणवत्ता वाला और उच्च जोश वाला माना जा सकता है।
उच्च विगर वाले बीज की पहचान
कभी-कभी दो बीज लॉट का अंकुरण प्रतिशत समान हो सकता है, लेकिन दोनों की ताकत एक जैसी नहीं होती। इसलिए विगर यानी अंकुर की मजबूती पर भी ध्यान देना चाहिए।
उच्च विगर वाले अंकुरों में यह विशेषताएं दिखाई देती हैं:
- जड़ मजबूत और स्पष्ट विकसित हो
- तना स्वस्थ और सीधा हो
- अंकुर समरूप दिखें
- कुल वृद्धि अच्छी हो
यदि सामान्य अंकुरों की संख्या अधिक हो और उनमें वृद्धि भी संतुलित हो, तो बीज की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है।
किसान अपने घर पर अंकुरण परीक्षण कैसे करें
हर किसान के पास प्रयोगशाला की सुविधा नहीं होती, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बीज की जांच नहीं की जा सकती। खेत में बुवाई से पहले घर पर भी एक सरल परीक्षण किया जा सकता है।
इसके लिए पेपर टॉवल की जरूरत नहीं है। एक छोटा बर्तन और बालू पर्याप्त है।
घर पर जांच की सरल विधि
- एक छोटा बर्तन लें।
- उसमें साफ बालू भरें।
- बालू को इतना गीला करें कि उसमें पर्याप्त नमी रहे।
- 100 या 200 बीज गिनकर डालें। जितने बीज डालें, पहले गिनती अवश्य करें।
- बर्तन को घर में किसी ठंडी या कम गर्म जगह पर रखें।
- बीच-बीच में पानी देते रहें, ताकि नमी बनी रहे।
- लगभग 5 से 6 दिन बाद अंकुरण की स्थिति देखें।
बालू से अंकुरित बीजों को निकालना सामान्यतः आसान होता है। निकालते समय ध्यान से देखें कि अंकुर सीधे और सामान्य हैं या मुड़े हुए और कमजोर।
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घर पर परिणाम का आकलन कैसे करें
यहां भी वही सिद्धांत लागू होगा जो प्रयोगशाला में अपनाया जाता है। केवल उन अंकुरों को गिनें जो सामान्य हों।
यदि अंकुर का तना और जड़ सही दिशा में, स्वस्थ और संतुलित दिख रहे हों, तो उसे सामान्य अंकुर मानें। यदि अंकुर टेढ़ा-मेढ़ा, मुड़ा हुआ या कमजोर हो, तो उसे सामान्य अंकुरण में शामिल न करें।
उदाहरण के लिए, यदि आपने 100 बीज डाले और उनमें 70 सामान्य अंकुर मिले, तो बीज का अंकुरण 70 प्रतिशत माना जाएगा। ऐसे बीजों की बुवाई निश्चिंत होकर की जा सकती है, क्योंकि खेत में भी उनसे अच्छी उगाव मिलने की संभावना रहती है।
अंकुरण परीक्षण करते समय महत्वपूर्ण सावधानियां
- बीजों की गिनती सही रखें
- नमी पर्याप्त हो, पर पानी भरा हुआ न हो
- बीज समान दूरी पर रखें
- रोल बनाते समय दबाव बहुत हल्का रखें
- परिणाम पढ़ते समय सामान्य और असामान्य अंकुर में अंतर ठीक से समझें
- केवल सामान्य अंकुरों के आधार पर अंकुरण प्रतिशत निकालें
बुवाई से पहले बीज जांचना क्यों जरूरी है
यदि बीज का अंकुरण पहले से पता हो, तो बुवाई का निर्णय बेहतर तरीके से लिया जा सकता है। कमजोर बीज बोने से खेत में पौध संख्या कम हो सकती है, दोबारा बुवाई की जरूरत पड़ सकती है, और लागत भी बढ़ती है।
इसके विपरीत, अच्छे अंकुरण वाले बीज बोने पर खेत में एकरूप उगाव मिलता है, पौध स्थापना बेहतर होती है, और आगे की फसल प्रबंधन प्रक्रिया भी आसान हो जाती है।
निष्कर्ष
सोयाबीन बीज का अंकुरण परीक्षण एक साधारण लेकिन अत्यंत उपयोगी प्रक्रिया है। प्रयोगशाला में यह काम मानक पेपर टॉवल विधि, नियंत्रित तापमान, उचित आर्द्रता और सात दिन की इनक्यूबेशन अवधि के साथ किया जाता है। इसमें सामान्य अंकुर, असामान्य अंकुर और मृत बीज अलग-अलग गिने जाते हैं, और सामान्य अंकुरों के आधार पर अंकुरण प्रतिशत तय किया जाता है।
यदि प्रयोगशाला उपलब्ध न हो, तो घर पर बालू की सहायता से भी एक उपयोगी प्राथमिक जांच की जा सकती है। बुवाई से पहले यह छोटा सा प्रयास खेत में बेहतर उगाव, मजबूत पौध स्थापना और अधिक भरोसेमंद परिणाम देने में मदद करता है।
वैज्ञानिक पद्दती से सोयाबीन बीज का अंकुरण कैसे जाँचे ?? || NSRI INDORE









