मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने एक बार फिर बदलाव दिखाया है। ग्वालियर, रीवा समेत प्रदेश के करीब 20 जिलों में मध्यम से घने कोहरे का असर देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने 1 से 3 फरवरी के बीच आंधी और बारिश की संभावना जताई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) के सक्रिय होने के कारण हो रहा है। इसका असर मध्यप्रदेश के उत्तरी हिस्से जैसे : ग्वालियर, चंबल, सागर और उज्जैन संभाग में ज्यादा रहने की संभावना है।
मौसम विभाग का कहना है कि 2 और 5 फरवरी को पश्चिम और उत्तरी भारत में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसका प्रभाव मध्य प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। 10 फरवरी तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश हो सकती है।
अगले 3 दिन का मौसम पूर्वानुमान
- 1 फरवरी को ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है।
- 2 फरवरी को नीमच, मंदसौर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में बारिश हो सकती है।
- 3 फरवरी को ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा जिलों में आंधी, गरज-चमक और बारिश का अलर्ट है।
बारिश से पहले कोहरे का असर
शनिवार सुबह ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, कटनी, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में हल्के से मध्यम कोहरे की स्थिति बनी रही। भोपाल समेत अन्य जिलों में भी सुबह के समय कोहरा छाया रहा। शुक्रवार को जबलपुर में भी कोहरे का असर देखा गया।
सिस्टम लौटने के बाद फिर बढ़ेगी ठंड
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में हो रही बर्फबारी और बारिश का असर मध्य प्रदेश के मौसम पर पड़ रहा है। ऊपरी वायुमंडल में तेज गति से चल रही हवाओं के कारण प्रदेश में ठंडी हवाएं सक्रिय हैं। मौसम विभाग के अनुसार, जब यह सिस्टम आगे बढ़ेगा तो प्रदेश में एक बार फिर ठंड का दौर आएगा और दिन व रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी।
यह भी देखें : gehu panjiyan 2026-27 : समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन हेतु पंजीयन
सतना में 50 मीटर विजिबिलिटी, राजगढ़ सबसे ठंडा
शुक्रवार सुबह सतना में घना कोहरा छाने से विजिबिलिटी करीब 50 मीटर तक सीमित रही। वहीं रात के समय भोपाल, ग्वालियर समेत लगभग 25 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। राजगढ़ प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
भोपाल, मंदसौर, कटनी, शाजापुर, ग्वालियर, राजगढ़, पचमढ़ी, खजुराहो, दमोह, रीवा, रायसेन, शिवपुरी, दतिया, गुना, उमरिया, नौगांव, श्योपुर, धार, मंडला, रतलाम, टीकमगढ़, सागर और सतना में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से कम रहा।
मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में जनवरी का सर्दी ट्रेंड
भोपाल में जनवरी में कड़ाके की ठंड के साथ कभी-कभी गर्मी और बारिश का भी ट्रेंड रहा है। 18 जनवरी 1935 को यहां न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि 26 जनवरी 2009 को दिन का तापमान 33 डिग्री तक पहुंच गया था।
इंदौर में जनवरी के दौरान तापमान माइनस में भी दर्ज किया जा चुका है। 16 जनवरी 1935 को यहां न्यूनतम तापमान माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।
जबलपुर में जनवरी के महीने में ठंड और बारिश दोनों का असर देखने को मिलता है। 7 जनवरी 1946 को यहां न्यूनतम तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस रहा था।
ग्वालियर में उत्तरी हवाओं के कारण जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। यहां 1954 में न्यूनतम तापमान माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
उज्जैन में भी उत्तरी हवाओं का प्रभाव रहता है। 22 जनवरी 1962 को यहां तापमान 0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
इसी प्रकार की मौसम पूर्वानुमान, खेती किसानी और मंडी भाव से से जुड़ी जानकारी सबसे पहले अपने मोबाइल पर पाने के लिए अभी जुड़े हमारे Whatsapp ग्रुप पर ।











